प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जिसकी स्थापना 1956 में हुई थी, भारत सरकार की प्रमुख वित्तीय जाँच एजेंसी है, जिसे विदेशी मुद्रा प्रबंधन और धन शोधन निवारण से संबंधित कानूनों को लागू करने का दायित्व सौंपा गया है। दशकों से, निदेशालय भारत के आर्थिक, कानूनी और नियामक वातावरण के अनुरूप लगातार विकसित हुआ है, फेरा से फेमा के प्रशासन में परिवर्तित हुआ, और आज धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) और भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए) के प्रवर्तन का नेतृत्व कर रहा है।
इस सिद्धांत से निर्देशित होकर कि अपराध से कोई भी लाभ होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, निदेशालय धन शोधन और संबंधित आर्थिक अपराधों का पता लगाने, उन्हें बाधित करने और रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारे प्रयास यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं कि अपराध से प्राप्त आय की पहचान की जाए, उसे सुरक्षित किया जाए और उसे वैध वित्तीय प्रणाली में प्रवेश करने से रोका जाए, जिससे भारत के वित्तीय ढांचे की अखंडता बनी रहे।
निदेशालय न केवल अपराध की आय की पहचान करने और उसे रोकने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी प्रतिबद्ध है कि कानून लागू होने (प्रवर्तन) का लाभ उन लोगों तक पहुंचें जिन्हें इन अपराधों के कारण नुकसान हुआ है। यद्यपि, विधि के तहत संपत्ति-वापसी (प्रत्याहरण) प्रक्रिया का प्रावधान किया गया हैं, निदेशालय उचित सत्यापन और कानूनी जांच के बाद जब्त या कुर्क संपत्ति को सही दावेदारों को वापस करने के लिए एक संरचित प्रक्रिया अपनाता है। यह पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण, जो कि व्यक्तियों, वित्तीय संस्थाओं, घर खरीदने वालों और अन्य पीड़ित पक्षों को संपत्ति, जमा, मूल्यवान वस्तुओं और अन्य परिसंपत्तियों की वापसी में परिलक्षित होता है, यह सुनिश्चित करता है कि प्रवर्तन परिणाम ठोस राहत में परिवर्तित हो।
वित्तीय अपराध की प्रकृति के तेजी से जटिल और प्रौद्योगिकी-संचालित होने के साथ, ईडी ने जांच के लिए एक एकीकृत और आधुनिक दृष्टिकोण अपनाया है। उन्नत साइबर फोरेंसिक क्षमताओं, विशेष विश्लेषणात्मक उपकरणों और समर्पित तकनीकी सहायता संरचनाओं की स्थापना ने सटीकता और गति के साथ साक्ष्य एकत्र करने, संसाधित करने और प्रस्तुत करने की हमारी क्षमता को मजबूत किया है।
आर्थिक अपराधों के सीमा पार आयाम को पहचानते हुए, निदेशालय ने अपने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को भी गहरा किया है। बहुपक्षीय प्लेटफार्मों और विदेशी न्यायालयों के साथ हमारी भागीदारी वैश्विक संपत्ति का पता लगाने, सूचना साझा करने और समन्वित प्रवर्तन कार्यों में भारत के प्रयासों का समर्थन करती है। ये साझेदारियां धन शोधन(मनी लॉन्ड्रिंग) के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय की लड़ाई में सार्थक योगदान करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
निदेशालय की उपलब्धियां देश भर में हमारे अधिकारियों और कर्मचारियों के अटूट समर्पण और पेशेवर रवैये का परिणाम हैं। उनकी लगन, ईमानदारी और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता कानून के शासन को मजबूत करने और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सहायक रही है। मैं ईडी परिवार के प्रत्येक सदस्य को उनकी सेवा के लिए हार्दिक बधाई देता हूं।
आगे बढ़ते हुए, निदेशालय अपनी संस्थागत क्षमताओं को बढ़ाना, तकनीकी बुनियादी ढांचे को उन्नत करना, अंतर-एजेंसी समन्वय को मजबूत करना और निरंतर क्षमता निर्माण में निवेश करना जारी रखेगा। ईडी अपने जनादेश के निर्वहन में पारदर्शिता, जवाबदेही और उत्कृष्टता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने और राष्ट्र की वित्तीय अखंडता की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित है।
जय हिन्द!
(राहुल नवीन)
प्रवर्तन निदेशक
