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अपराध से अर्जित आय (पीओसी) को उसके सही दावेदारों को लौटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, माननीय विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा अन्वेषणाधीन मेसर्स अजमेरा समूह एवं अन्य के मामले में धन शोधन के अपराध के पीड़ितों तथा सही दावेदारों को ₹8.41 करोड़ मूल्य की संपत्तियों के प्रत्याहरण का आदेश पारित किया है। प्रवर्तन निदेशालय वित्तीय अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने तथा ऐसे अपराधों के पीड़ितों को न्याय दिलाने की अपनी प्रतिबद्धता के प्रति निरंतर कटिबद्ध है। हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ यूटी प्रशासन और चंडीगढ़ व पंचकुला स्थित दो निजी स्कूलों के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में रखे गए बैंक खातों से 645 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन के गबन के मामले में ईडी, चंडीगढ़ आंचलिक कार्यालय ने निदेशक, विकास एवं पंचायत, हरियाणा के कार्यालय में तत्कालीन अधीक्षक नरेश कुमार को पीएमएलए, 2002 के तहत 10.06.2026 को गिरफ्तार किया है। ईडी ने पीएसीएल मामले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिसमें माननीय विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने ईडी के द्वारा जस्टिस लोढ़ा समिति को 9,420.57 करोड़ रुपये वर्तमान बाजार मूल्य की 282 अचल संपत्तियाँ वापिस लौटाने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई लाखों भोले-भाले निवेशकों को उनके धन वापस दिलवाने के उद्देश्य से पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है। ईडी दिल्ली ज़ोनल कार्यालय ने पीएमएलए, 2002 के तहत मेसर्स जेसी वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स इन्वेस्टर्स क्लिनिक इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड की मौजूदा बाज़ार कीमत क्रमशः लगभग 40 करोड़ रुपये और 60 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया है। यह कुर्की व्यापक पैमाने पर जनता के धन के दुरुपयोग व धोखाधड़ी के संबंध में धन-शोधन की उस जांच का हिस्सा है जिसमें मेसर्स जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल), मेसर्स जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) व उनसे संबंधित कंपनियाँ शामिल हैं। इस मामले में अब तक कुल 500 करोड़ रुपये (लगभग) की कुर्की की जा चुकी है। इससे पहले इस मामले में, मेसर्स जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के प्रबंधक निदेशक मनोज गौड़ को 13.11.2025 को पीएमएलए, 2002 के तहत गिरफ्तार किया गया था और वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपने 70 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित माइगव अभियान का सफलतापूर्वक संपन्न किया। अभियान के दौरान प्राप्त 13,000 से अधिक प्रश्नोत्तरी प्रविष्टियाँ तथा नागरिकों के बहुमूल्य सुझाव वित्तीय सत्यनिष्ठा को सुदृढ़ बनाने और आर्थिक अपराधों के विरुद्ध संघर्ष में जनसहभागिता की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। अपराध से अर्जित आय (पीओसी) को उसके सही दावेदारों को लौटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, माननीय विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा अन्वेषणाधीन मेसर्स अजमेरा समूह एवं अन्य के मामले में धन शोधन के अपराध के पीड़ितों तथा सही दावेदारों को ₹8.41 करोड़ मूल्य की संपत्तियों के प्रत्याहरण का आदेश पारित किया है। प्रवर्तन निदेशालय वित्तीय अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने तथा ऐसे अपराधों के पीड़ितों को न्याय दिलाने की अपनी प्रतिबद्धता के प्रति निरंतर कटिबद्ध है। हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ यूटी प्रशासन और चंडीगढ़ व पंचकुला स्थित दो निजी स्कूलों के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में रखे गए बैंक खातों से 645 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन के गबन के मामले में ईडी, चंडीगढ़ आंचलिक कार्यालय ने निदेशक, विकास एवं पंचायत, हरियाणा के कार्यालय में तत्कालीन अधीक्षक नरेश कुमार को पीएमएलए, 2002 के तहत 10.06.2026 को गिरफ्तार किया है। ईडी ने पीएसीएल मामले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिसमें माननीय विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने ईडी के द्वारा जस्टिस लोढ़ा समिति को 9,420.57 करोड़ रुपये वर्तमान बाजार मूल्य की 282 अचल संपत्तियाँ वापिस लौटाने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई लाखों भोले-भाले निवेशकों को उनके धन वापस दिलवाने के उद्देश्य से पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है। ईडी दिल्ली ज़ोनल कार्यालय ने पीएमएलए, 2002 के तहत मेसर्स जेसी वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स इन्वेस्टर्स क्लिनिक इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड की मौजूदा बाज़ार कीमत क्रमशः लगभग 40 करोड़ रुपये और 60 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया है। यह कुर्की व्यापक पैमाने पर जनता के धन के दुरुपयोग व धोखाधड़ी के संबंध में धन-शोधन की उस जांच का हिस्सा है जिसमें मेसर्स जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल), मेसर्स जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) व उनसे संबंधित कंपनियाँ शामिल हैं। इस मामले में अब तक कुल 500 करोड़ रुपये (लगभग) की कुर्की की जा चुकी है। इससे पहले इस मामले में, मेसर्स जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के प्रबंधक निदेशक मनोज गौड़ को 13.11.2025 को पीएमएलए, 2002 के तहत गिरफ्तार किया गया था और वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपने 70 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित माइगव अभियान का सफलतापूर्वक संपन्न किया। अभियान के दौरान प्राप्त 13,000 से अधिक प्रश्नोत्तरी प्रविष्टियाँ तथा नागरिकों के बहुमूल्य सुझाव वित्तीय सत्यनिष्ठा को सुदृढ़ बनाने और आर्थिक अपराधों के विरुद्ध संघर्ष में जनसहभागिता की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
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निदेशक का संदेश

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जिसकी स्थापना 1956 में हुई थी, भारत सरकार की प्रमुख वित्तीय जाँच एजेंसी है, जिसे विदेशी मुद्रा प्रबंधन और धन शोधन निवारण से संबंधित कानूनों को लागू करने का दायित्व सौंपा गया है। दशकों से, निदेशालय भारत के आर्थिक, कानूनी और नियामक वातावरण के अनुरूप लगातार विकसित हुआ  है, फेरा से फेमा के प्रशासन में परिवर्तित हुआ, और आज धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) और भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए) के प्रवर्तन का नेतृत्व कर रहा है। और पढ़ें

श्री राहुल नविन

प्रवर्तन निदेशक

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